विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 17 अक्टूबर 2016
खार
दास्ताँ
लिखने को बहुत कुछ है मगर
शब्द उतरे अब बगावत पर
इक इक लफ्ज़ तड़पता रहा
दास्ताँ अपनी अपनी सुनाकर।।
मौली
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