तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

मंगलवार, 25 अगस्त 2015



मोह के धागे जब तोड़ दिए तूने ओ हमदम
अब ये जुड़ते तो हैं पर चुभते भी बहुत है..
शेष है कांच की नींदें और कंकड़ के ख्वाब
ज़ख़्मी है ऑंखें लहू बन छलकते हैं आंसूं।।
                     ~~मौली~~

सोमवार, 3 अगस्त 2015

कितने हर्फ़ खर्च हुयेे सिखाने में तुम्हे रिश्तों की परिभाषा
पर तुम वफा का पहला वर्णाक्षर ही कभी सीख न सके।।
                            ~~मौली~~
जीवन मेरे भीतर है या मैं जीवन में
ये रहस्य नही जानना मुझे कदापि
जीवन का अर्थ नही ढूंढना मुझे बस
मैं जीवन को प्रेम से जीना चाहती हूँ।।
             ~~~मौली~~~~