तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

रौशनी को बेड़ियों में यूँ तो  न जकड़ो
अमावस को इसका इंतज़ार आज भी है।
    ।।मौली।।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

नयन में नीर है तो क्या मगर हम मुस्कुरायेंगे।

ह्रदय की पीर अधरों पर सजाकर गुनगुनायेंगे।

वो जिन रातों ने रेज़ा रेज़ा सारे ख़्वाब तोड़े थे,

उन्हीं रातों से हम अपना सवेरा छीन लायेंगे।
     । ।मौली।।

मंगलवार, 13 सितंबर 2016

बुत

ज़रा तो ठहरो...                                                    फ़ेर के निगाहें जाने वाले...
भ्रम के मायाजाल से निकलने तो दो.....
रिश्ते के ढाई आखर को सहेजने तो दे
पन्नें, मेरे भरोसे के बटोरने तो दे.....  
चले जाना के पलकों के कतारों को भींग जाने तो दे.....                                                    सिरहाने रख दूँ दुआएं ये मोहलत तो दे....
फरेब की सिलवटों को जी भरके फिर देखने तो दे.....
जा ...के अब न मिलूंगी फिर दोबारा कभी
मुझे बुत में ज़रा तब्दील होने तो दे......
मुझे बुत में ज़रा तब्दील होने तो दे....
                 मौली।।

रविवार, 11 सितंबर 2016

बियाबां

वीरान बस्तियों के बियाबां बाग़ तरसते हैं एक एक बूँद को
बारिशों को भी देखो कमबख्त बरसते है जाकर सागर पे।।
                ।।मौली।।