तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 11 सितंबर 2016

बियाबां

वीरान बस्तियों के बियाबां बाग़ तरसते हैं एक एक बूँद को
बारिशों को भी देखो कमबख्त बरसते है जाकर सागर पे।।
                ।।मौली।।

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