तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

नयन में नीर है तो क्या मगर हम मुस्कुरायेंगे।

ह्रदय की पीर अधरों पर सजाकर गुनगुनायेंगे।

वो जिन रातों ने रेज़ा रेज़ा सारे ख़्वाब तोड़े थे,

उन्हीं रातों से हम अपना सवेरा छीन लायेंगे।
     । ।मौली।।

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