नयन में नीर है तो क्या मगर हम मुस्कुरायेंगे।
ह्रदय की पीर अधरों पर सजाकर गुनगुनायेंगे।
वो जिन रातों ने रेज़ा रेज़ा सारे ख़्वाब तोड़े थे,
उन्हीं रातों से हम अपना सवेरा छीन लायेंगे। । ।मौली।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें