कुछ अनकहे से शब्द तुमसे कहने रह गए कुछ अनछुये से अहसास अनछुये रह गए मेरे मृगतृष्णा से नयनों के अनसुलझे प्रश्न तेरे अधरों के अधूरे जवाब अधूरे रह गए।। ~~~~मौली~~~~
शुक्रवार, 15 मई 2015
कृष्णा ह्रदय को तेरी ही है आस तुझ बिन हर मौसम लगे खरमास बाँट जोहूँ मैं सखा तेरी दिन रात आ संग मिल हम करेंगे फिर रास। ~~मौली~~
मंगलवार, 12 मई 2015
तुझसे बिछड़ने के खौफ से पथराई इन आँखों ने सनम फिर पलट कर कभी घडी की तरफ उम्र भर नही देखा ।। ~~~~मौली~~~~
बुधवार, 6 मई 2015
रिश्तों की सीवन जब लगे उधड़ने और पैबंद रहम का लगे दुष्कर नीरसता और विवशता सा लगे सम्बन्ध तब इसे तजना ही श्रेयकर।। ~~~~मौली~~~~
सोमवार, 4 मई 2015
गुलों की भी है कितनी खूबसूरत दास्तां किस तरह एक गुल बनाती पूरी गुलिस्तां न होता इस जहाँ में कहीं भी वैमनस्यतां काश के हम मानव भी होते थोड़े शाइस्ता।