तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 25 मई 2015



मेरी ज़ुस्तजू का कत्ल कर उम्मीदों को कर दफन
जा बैठें हैं रिन्द के महफ़िल में ओढ़े मेरा ही कफ़न।
~~मौली~~

गुरुवार, 21 मई 2015




पाबोसी का उसने आज मुझे ये सीला दिया
के पाबन्द समझ मुझे पापोश बना दिया।।
~~मौली~~

पाबोसी - पदचुम्बन,पूजा
पाबन्द - पराधीन
पापोश - पादुका पोछने का कालीन (doormat)

सोमवार, 18 मई 2015



कुछ अनकहे से शब्द तुमसे कहने रह गए
कुछ अनछुये से अहसास अनछुये रह गए
मेरे मृगतृष्णा से नयनों के अनसुलझे प्रश्न
तेरे अधरों के अधूरे जवाब अधूरे रह गए।।
~~~~मौली~~~~

शुक्रवार, 15 मई 2015



कृष्णा ह्रदय को तेरी ही है आस
तुझ बिन हर मौसम लगे खरमास
बाँट जोहूँ मैं सखा तेरी दिन रात
आ संग मिल हम करेंगे फिर रास।
~~मौली~~

मंगलवार, 12 मई 2015



तुझसे बिछड़ने के खौफ से पथराई इन आँखों ने सनम
फिर पलट कर कभी घडी की तरफ उम्र भर नही देखा ।।
~~~~मौली~~~~

बुधवार, 6 मई 2015



रिश्तों की सीवन जब लगे उधड़ने और पैबंद रहम का लगे दुष्कर
नीरसता और विवशता सा लगे सम्बन्ध तब इसे तजना ही श्रेयकर।।
~~~~मौली~~~~

सोमवार, 4 मई 2015




गुलों की भी है कितनी खूबसूरत दास्तां
किस तरह एक गुल बनाती पूरी गुलिस्तां
न होता इस जहाँ में कहीं भी वैमनस्यतां
काश के हम मानव भी होते थोड़े शाइस्ता।


~~~~मौली~~~~