सूने दिल की दस्तक भला अब सुनता है कौन
रास आये रौनकें,अंधियारे दिल की देखता कौन
मौली
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 20 नवंबर 2017
सोमवार, 2 अक्टूबर 2017
इंतज़ार की गिलहरियां
ख्वाहिशों की टहनियों से लिपटी आकाश बेल सी उम्मीदें
इंतज़ार की गिलहरियां
कुतरने पे है क्यों आमादा।।
मौली
मंगलवार, 18 अप्रैल 2017
अनिर्वाण
दग्ध विदीर्ण ह्रदय
मेघ सा भीगा मन
पर्वत सा ऊंचा होता
अभिमान
कैसे लांघा जाये,
बेदम सी है सांसे
थके थके से कदम
तोतली अतीत की
पोटली
वृद्ध जीर्ण कांधा,
कोहरे सी धुंधली
अश्रुपूरित नयन
विषय वासना की
अतृप्त पांडुलिपि,
कहानी किसकी
लिख रहा कौन
आस का धैर्यदीप
मरुस्थल की आंधी
यौवन को सहेजने
की अविराम चेष्टा
या तिलस्मी मोहपाश में
बंधा हमारा रिश्ता,
वृथा है ये अभिसार
अगम्य अनिर्वाण
प्रयत्न क्यों
जैसे पतझड़ में बादल की
अंतहीन तलाश
या सांध्य पुष्पों का रात्रि तक सुगन्ध हीन होने की असाध्य पीड़ा.....
।। मौली।।
रविवार, 26 मार्च 2017
दस्तक
तू अजनबी इक
दस्तक
मैं बंदिशों में कैद
किवाड़
तू उश्रृंखल विशाल
सागर
मैं दायरों में बहती नदी
तू अपरिचित इक
मंज़िल
मैं चिर परिचित सी
पगडंडी
तू मांझे की तेज़ डोर
मैं कटी हुई इक
पतंग
तू सुर का तीव्र
सप्तक
मैं वीणा की शांत
झंकार
तू मदमस्त उन्मुक्त
बादल
मैं रिवाजों में जकड़ी धरती
तू रात का पहला प्रहर
मैं भोर की पहली
किरण
तू खिली धूप सी सुखद दोपहरी
मैं कोहरे की चादर में लिपटी सुखद शाम
मौली
मंगलवार, 3 जनवरी 2017
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