तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

इंतज़ार की गिलहरियां

ख्वाहिशों की टहनियों से लिपटी आकाश बेल सी  उम्मीदें
इंतज़ार की  गिलहरियां
कुतरने पे है क्यों आमादा।।
       मौली