विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 15 दिसंबर 2014
७०-
भूल जाइये या भूल जाने दीजिये
अब और न हमको तबाह कीजिये
वफ़ा न सही ज़फ़ा भी न दीजिये
अलविदा के वक्त तो दुआ कीजिये।।
__ मौली
६९-
किनारा दिखा कर मुझे मांझी ने लूटा
कश्ती भी छूटी और पतवार भी छूटा
इस ज़िन्दगी का ये फ़लसफ़ा है झूठा
सौदा था खरा मगर मुकद्दर था रूठा।।
__ मौली
६८-
बिछ्ड़न की चादर पे यादों की सलवटें सहेजती रह गई
पतझड़ की हवाएं शाखों से ही उजाड़ कर बिखर गईं।
__ मौली
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