विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 15 दिसंबर 2014
६९-
किनारा दिखा कर मुझे मांझी ने लूटा
कश्ती भी छूटी और पतवार भी छूटा
इस ज़िन्दगी का ये फ़लसफ़ा है झूठा
सौदा था खरा मगर मुकद्दर था रूठा।।
__ मौली
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