तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 15 दिसंबर 2014

६८-





बिछ्ड़न की चादर पे यादों की सलवटें सहेजती रह गई
पतझड़ की हवाएं शाखों से ही उजाड़ कर बिखर गईं।

__ मौली

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