विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शनिवार, 10 मई 2014
६२-
होठों. पर लगी. है. पाबन्दी. लफ़्ज़ों. की. तो. क्या
निगाहों. को इजहारे. मोहब्बत की इजाजत तो दे
कहाँ. तक. दफ़नायें. दिल. की आरजुओं. को हम
न मालूम मेरे प्यार की सहर कभी होगी कि नहीं।।
__ मौली
६१-
जिन्हे मुझसे दूर रहना कभी गवारा न था
वो ख्वाबों में आने से भी अब कतराते हैं।
__ मौली
६०-
संग तुम तो मेरा हर दिन मधुमास सा लगे
ओस की बूँद मे भी तेरा आभास सा लगे
तेरे बगैर चाँदनी भी अमावस सी लगे
स्वाती की हर बूँद भी सँत्रास सा लगे।।
__ मौली
५९-
न जाने वो क्यों अब मुझसे कतराने लगा
रस्मे मोहब्बत को वो अब झुठलाने लगा
टूटकर चाहा था जिसे हमने खुद से ज्यादा
वही आज मुझसे अपना दामन छुड़ाने लगा।।
-- मौली
५८-
तन्हाई में मेरे कोई शरीक न हुआ
रुसवाई में शामि शहर हुआ
उजड़ा जो देखा घर मेरा
जश्न मनाया लोगों ने।।
__ मौली
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