विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शनिवार, 10 मई 2014
५८-
तन्हाई में मेरे कोई शरीक न हुआ
रुसवाई में शामि शहर हुआ
उजड़ा जो देखा घर मेरा
जश्न मनाया लोगों ने।।
__ मौली
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