तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

६७-





बारिश की हर बूँद में तेरा अक्श नजर आया
तेरे साथ गुजारा हुआ हर मंजर याद आया।

__ मौली

६६-





ज़िन्दगी यूँ भी तो गुजर रही थी वीरानी में
आज तेरी कमी न जाने क्यों सताने लगी।

__ मौली

६५-





तमाम रात समेटा है आँखों में हमने
.......इक-इक लमहा इंतज़ार में तेरे।

__ मौली

रविवार, 9 नवंबर 2014

६४-





तेरी ज़फ़ा को भी नजरअंदाज किया हमने मगर
तुम तो उम्मीदों का दामन ही छुड़ा चले मुझसे।

__ मौली

६३-






तेरी हर सदा ने बहुत तड़पाया है हमें
तेरे हर आँसू ने बहुत रुलाया है हमें
तेरी हर कसक-दर्द का इल्म है मगर
रस्मों-रिवाज ने बहुत उलझाया है मुझे।।

__ मौली