तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

६५-





तमाम रात समेटा है आँखों में हमने
.......इक-इक लमहा इंतज़ार में तेरे।

__ मौली

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें