तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 9 नवंबर 2014

६३-






तेरी हर सदा ने बहुत तड़पाया है हमें
तेरे हर आँसू ने बहुत रुलाया है हमें
तेरी हर कसक-दर्द का इल्म है मगर
रस्मों-रिवाज ने बहुत उलझाया है मुझे।।

__ मौली


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