तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 30 दिसंबर 2018

अनूठा इश्क

प्रेम और विश्वास
के रंगीन धागों से
दिया था बुनने
एक रिश्ता
अनूठे प्रेम का
क्यों
तिश्नगी का
तानाबाना बुना,तूने
क्षणभंगुर देह की
लालसा का
मैंने जाना ही कब ?
किसी को कभी  -
 इन्तजार हमारा  था  ?
 बस एक भ्रम सुहाना सा था   
 के उनपे अधिकार हमारा था ......

                      मौली



शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

मन

हताश बैठी सोच रही थी दिल तन्हा था बेहद सोचा क्या करूँ ?इश्क ही करूँ प्रेम के पास गई वो बोला मैं रिटायर हो गया.....अब मेरा कहाँ ठिकाना मैं स्तब्ध..दौड़कर विश्वास के पास गई उसने बोला गैरन्टी पीरियड खत्म, निस्तब्ध...फिर मन से कहा तुम तो हो वो बोली,अब लाइफ टाइम आफर कहाँ, भागती रही बेतहाशा तभी मुझे स्वप्न मिला हठात मैंने लपक कर उसका हाथ थामा, हाथ छुड़ा वो बोला पगली,अब मुझे कोई नही देखता सब अब अपने अस्तीत्व को देखते है..... बिलख पड़ी मैं अनायास...ये क्या नितांत मैं असहाय! अचानक किसी का स्पर्श कांधे पे पाकर सिहर उठी...मुस्कुराकर वो बोली मैं हूँ उम्मीद जब तक मैं हूं तू क्यों बिलखती है........ मौली