विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 18 मई 2015
कुछ अनकहे से शब्द तुमसे कहने रह गए
कुछ अनछुये से अहसास अनछुये रह गए
मेरे मृगतृष्णा से नयनों के अनसुलझे प्रश्न
तेरे अधरों के अधूरे जवाब अधूरे रह गए।।
~~~~मौली~~~~
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