तनहा चले थे जिन राहों पे,
उन गलियों से लगता है अब डर,
किससे कहें चलो साथ मेरे कुछ दूर,
सब तो काफ़िले में हैं मशगूल,
गुबार धूल का पूछता मुझसे मेरा वजूद,
हँस कर बोली मैं..........
तलाश में हूँ जमाने से
कहाँ है............
"मेरा वजूद"...............।।
__ मौली
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