विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015
रिश्तों की अहमियत गर समझ पाते जो तुम कभी
तो ज़िन्दगी कभी सज़ा तो कभी यूँ न बनती कज़ा।।
।।मौली।।
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