तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 16 सितंबर 2015















सिलवटें नफरतों के तूने जो दिये दिल पे मेरे
राफ्ता राफ्ता उसे मिटाना भी है मुझे अभी
आँख नम मगर होंठो को मुस्कुराना है अभी
आस में सहर के रात को तो जीना है अभी।।
                                             ~~मौली~~

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