तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 16 जुलाई 2018

दो सौंधे जिस्म

लबों पे अब भी तेरा नाम है

आवाज़ में लेकिन  दरार है

मासूम आंखों में धुंधली

अजनबी सी इक तस्वीर

आज भी है....

न मिल सके सौंधे से दो जिस्म

दो रूह कबके एक हो चुके

उमड़ते घुमड़ते से जज़्बातों में

एक ठंडा सावन बरस रहा

दिल चीखता रहा और देखो

बेखौफ धड़कने थिरकती रही

उम्र की मियाद खत्म हो चली

तुम आओगे ये यकीन आज भी है।

                   मौली

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