लबों पे अब भी तेरा नाम है
आवाज़ में लेकिन दरार है
मासूम आंखों में धुंधली
अजनबी सी इक तस्वीर
आज भी है....
न मिल सके सौंधे से दो जिस्म
दो रूह कबके एक हो चुके
उमड़ते घुमड़ते से जज़्बातों में
एक ठंडा सावन बरस रहा
दिल चीखता रहा और देखो
बेखौफ धड़कने थिरकती रही
उम्र की मियाद खत्म हो चली
तुम आओगे ये यकीन आज भी है।
मौली
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