तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 13 अगस्त 2018

शरणार्थी

गहनतम घनेरी ह्र्दयस्थल में एक अकेला शरणार्थी बन आ जाओ जो मेरे जीवन में सप्तसुर बन गूँजूं मैं इन सुंदर फ़िज़ाओं में जो बन आ जाओ इंद्रधनुष सारे रंग मुझपे फब जायें जो बन जाओ ओस की बूंदें मेरे ख़ुश्क होंठ प्लावित हो जायें जो तुम जुगनूं बन आ जाओ मेरी स्याह रात प्रकाशित हो जायें।। मौली ~~~~~~~

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