गहनतम घनेरी ह्र्दयस्थल में
एक अकेला शरणार्थी बन
आ जाओ जो मेरे जीवन में
सप्तसुर बन गूँजूं मैं
इन सुंदर फ़िज़ाओं में
जो बन आ जाओ इंद्रधनुष
सारे रंग मुझपे फब जायें
जो बन जाओ ओस की बूंदें
मेरे ख़ुश्क होंठ प्लावित हो जायें
जो तुम जुगनूं बन आ जाओ
मेरी स्याह रात प्रकाशित हो जायें।।
मौली
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