विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
सोमवार, 20 अगस्त 2018
ख्वाब
ख्वाबों का क्या है साहब वो तो अब पराये हो चले.... उम्मीद जिनसे थी वाबस्ता वो अब गैरों के मसीहा हो चले..... मौली
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