तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शनिवार, 25 अगस्त 2018

आजमाईश

आज़माइश साज़िशें हैं मैं हूँ और क़िस्मत मिरी,
सोचती हूँ किसकी आँखों को छलकना चाहिए।
      मौली

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