तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

बावरा मन

बावरा ये मन हरपल तेरे ही रंग में रंगा   
ह्रदय में अनगिनत सतरंगी स्वप्न है सजा  
जीवन में क्यों आया यूँ अमावस का अँधेरा
आ जाओ न अब बनके चंद्रमा का हाला।।
              मौली

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