एक प्रश्न
जो कभी
नौनिहाल था
फिर तरुण हुआ
तत्पश्चात युवा
और फिर वृद्धावस्था
वो प्रश्न आज भी
प्रश्नवाचक चिन्ह
लिए ज्यों का त्यों
विधमान है।
अंततगोत्वा वो
यक्षप्रश्न बना हुआ है
क्या इस प्रश्न का उत्तर
ईमानदारी से कोई दे
पायेगा??
मनुष्य रूप देकर
परमात्मा ने हमे भेजा
पर क्या हम अपने जन्म
को सार्थक कर पायें
कर्म धर्म का सामान्य
अर्थ समझ पायें
पशुओं को भी शर्मशार
कर हम इंसान कहलाते
हैं,ग्लानि का बोध तक
नही क्यों?
मौली
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