तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 30 मार्च 2016

प्रतीक्षा

सावन बीता,भादों बीता ,बीता शरद और हेमन्त बीता ऋतुराज बसंत भी बीता टेसू संग फागुन पर रीता रहा तन मन किस ऋतु तुम सुध लोगे पूछे अब खग विहंग इक इक पल लगे हैं सदियाँ कितनी करूँ मनुहार न ध्यान लगे प्रभु में, न भक्ति ही करी जाय साँझ सवेरे जपूं तुझी को तुझी में खोजूं सार जीवन की समझे कौन पीर जिया की विरह वेदना से मर्माहत मैं करूँ तुझे सुमिरन नयन बहे अविरल ढूंढे तुझे हरपल।। मौली

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