चलो आज थोडा रूमानी हो जायें
चाँद हो तश्तरी और तारे छप्पन भोग
आसमां बिछावन बन जाये
बादल चादर बन जाये
चलो आज थोडा रूमानी हो जायें।।
सागर की लहरें झूला बन जायें
नदियां मेरी सखियाँ बन जायें
सम्पूर्ण प्रकृति माँ की गोद बन जाये
चलो आज थोडा रूमानी हो जायें।।
दिल नौनिहालों सा सरल बन जाये
पर्वत रथ और सूर्य सारथी बन जायें
पृथ्वी शतरंज,ग्रह उपग्रह मोहरें बन जायें
चलो आज थोडा रूमानी हो जाये।।
मौली
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