तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

चलो आज थोडा रूमानी हो जायें

चाँद हो तश्तरी और तारे छप्पन भोग
आसमां बिछावन बन जाये
बादल  चादर बन जाये
चलो आज थोडा रूमानी हो जायें।।

सागर की लहरें झूला बन जायें
नदियां मेरी सखियाँ बन जायें
सम्पूर्ण प्रकृति माँ की गोद बन जाये
चलो आज थोडा रूमानी हो जायें।।

दिल नौनिहालों सा सरल बन जाये
पर्वत रथ और सूर्य सारथी बन जायें
पृथ्वी शतरंज,ग्रह उपग्रह मोहरें बन जायें
चलो आज थोडा रूमानी हो जाये।।
     मौली

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