तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

सहेज कर रक्खी
तुम्हारे यादों की
पोटली आज खोली
सोचा,कुछ अनमोल पल
चुन लूँ कुछ विसर्जित
कर दूँ......
अरे ! ये क्या ?
कुछ भी नही शेष बचा
तुम्हारी बेवफाई का दीमक
उन यादों को निर्मूल
कर गया...
आस की दवा भी
कब तक
हिफाज़त करती।।
मौली

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