तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014
५४-
कई फ़साने हैं इश्क के जुबाँ पे लोगों के मगर,
मेरे लब पे तेरे नाम के सिवा कुछ और नहीं
पूछा जो किसी ने मेरी इस उदासी का सबब,
छलके आँसुओं ने किया बयाँ तेरी बेवफ़ाई का।।
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