तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 10 जून 2015

 

आस के चाँद को सनम तेरे लिए ही बोया है
चांदनी की शीतलता भी तेरे ही लिए रोपा है
झिलमिल तारों की क्यारियां रौशन की हमने
आ जाओ के अब शबे-वस्ल ख़त्म होने को है।
~~मौली~~

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