तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 5 जून 2015

  
     

         अलविदा
कुछ लम्बी सफ़र थी बंधू
कुछ डगर भी थी कठिन
फिर भी मिलजुल कर हम

हंसते गाते सुख दुःख बांटते
बीते कुछ साल
चलते थक गई मैं
करुँगी अब विश्राम
क्लांत और आहत होकर
विदा मैं मांगू आज
भूल चूक जो हुई हो मुझसे
क्षमा करो जान अज्ञान
पूर्ण हुई अब यात्रा मेरी
अंतिम दो विदाई ||

सादर नमन सभी को
           || मौली||




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