अलविदा
कुछ लम्बी सफ़र थी बंधू
कुछ डगर भी थी कठिन
फिर भी मिलजुल कर हम
हंसते गाते सुख दुःख बांटते
बीते कुछ साल
चलते थक गई मैं
करुँगी अब विश्राम
क्लांत और आहत होकर
विदा मैं मांगू आज
भूल चूक जो हुई हो मुझसे
क्षमा करो जान अज्ञान
पूर्ण हुई अब यात्रा मेरी
अंतिम दो विदाई ||
सादर नमन सभी को
|| मौली||
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