किसे बताऊं कितनी शामें बन्द कमरों में कैसे बिताई है
कितनी बेबसियों कितनी बेचैनियों में गुज़ारे हर लम्हे
सिफारिश की पिंजर से रूह के चले जाने की
न सरगोशियां ही काम आई न गुज़ारिशें मंज़ूर हुई
हिज़्र की रातें थी मेरी और सहर भी सज़ायाफ्ता
नींदे तो गिरवी रख आयी थी सपने भी बेमोल बिके
ख्वाहिशें सूद के किश्तों में बेशुमार जाने लगी
कपड़ों के बदले तन का सौदा न कर सकी कभी
मिले जो ग़म बेतहाशा उन्हें हमसफ़र बना लिया
जिसे हमराज़ बनाया उसने ही मुझे तार तार किया।।
मौली
भाव और भाषा के अनमोल मिलन ।
जवाब देंहटाएंBet365 Casino Review and Ratings - Dr.MD
जवाब देंहटाएंRead our complete 2021 audit 제천 출장마사지 of Bet365 Casino before deciding which is the best place to 안동 출장마사지 play. Check 부산광역 출장안마 out what bonuses and games 용인 출장샵 you can claim 김해 출장안마 on Bet365