तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शनिवार, 10 मई 2014
६२-
होठों. पर लगी. है. पाबन्दी. लफ़्ज़ों. की. तो. क्या
निगाहों. को इजहारे. मोहब्बत की इजाजत तो दे
कहाँ. तक. दफ़नायें. दिल. की आरजुओं. को हम
न मालूम मेरे प्यार की सहर कभी होगी कि नहीं।।
वाह ! अतिसुन्दर !
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