विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 11 नवंबर 2016
रंगरेज
रंगरेज ने मेरे....नया रंग बुना है
मुझपे आज कैसा ये रंग खिला है।।
मौली
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