विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016
रात
सन्नाटों की धूल उड़ती है कहीं काली गहन रातों में तो कहीं यादों के अलाव जलते हैं सर्द रातों में।। २३.११.२०१६ मौली
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