तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 4 दिसंबर 2016

वक्त की ये साजिश थी या के मेरी किस्मत
सब्र के पैमाने को  अभी और  छलकना है।।
           मौली

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