तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

इसतरह से हमें वो भुलाने लगे। ख़ाक अपनी हवा में उड़ाने लगे। * हमने यूँ ही उन्हें बेवफ़ा जो कहा, आसमाँ अपने सर पे उठाने लगे। * नैन से नैन थोड़े मिले थे कि बस, आईने रोशनी को चिढ़ाने लगे। * आरज़ू जुस्तजू ख़्वाहिशें हसरतें स्वप्न नैनों में कुछ चहचहाने लगे। * आँधियाँ बारिशें बिजलियाँ आगयीं आशियाँ प्यार का जब बनाने लगे। * होंट पलकों पे उसने रक्खे जिस घडी, अक्स माजी के सब थरथराने लगे। * बेख्याली में झटकी जो जुल्फें ज़रा, सारे मौसम मुझे गुनगुनाने लगे। * 'मौली' जन्मों के तप का सिला ये मिला, बस मिले और फिर आज़माने लगे।

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