तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

बुधवार, 3 अगस्त 2016

सुनसान हाइवे

सुनसान हाईवे
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फर्राटे भरती गाड़ियों के
शोर में
खौफनाक घटना घटती रही
शासन दुस्साशन बना रहा
अस्मत तार तार होती रही
नारी शर्मशार होती रही
मानवता ज़ार ज़ार रोती रही
सुनसान हाईवे जश्न मनाता रहा

न ज़िन्दगी का कोई मोल रहा
न बची रिश्तों की कोई मर्यादा
क्रूरता और हैवानियत पुरज़ोर रहा
भीड़ में भी इंसान तन्हा रहा
सुनसान हाईवे जश्न मनाता रहा

अँधा कानून मूक बधिर बना रहा
राजनीति का तमाशा भी खूब रहा
चुनावी बाजार में नेताओं की सरगर्मियां पुरज़ोर रही
फरियादी की गुहार संसद के कोलाहल में दबता रहा
सुनसान हाईवे जश्न मनाता रहा

ज़िंदा लाशों को झूठे तसल्ली का कफ़न ओढ़ाते रहे
बेख़ौफ़ दरिंदे अगला शिकार तलाशते रहे
कुम्भ करण सा प्रशासन सोता रहा
नेता विरोधी दलों पे आरोपी रोटियां सेंकते रहे
सुनसान हाईवे जश्न मनाता रहा

कानून के रखवाले लिये बैशाखी नींद में सरपट दौड़ते रहे
दम तोड़ती सच्चाई पैदल चलती रही
देख ये खूंखार मंज़र धरित्री क्रंदन करती रही
सुनसान हाईवे अब काला इतिहास रचता रहेगा
सुनसान हाईवे मातम का जश्न मनाता रहेगा।।
               मौली

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