तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 7 अगस्त 2016

जीवन पथ

पथरीले जीवन पथ पर चलते क्लांत रक्तरंजित पांव को दुलराया किसने क्या माँ आज भी अपनी ममता का आँचल बिछाये बैठी है राहों में मेरे।। मौली

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