तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

मंगलवार, 20 जनवरी 2015



खिज़ा ने शाखों से पत्तों को जुदा क्या किया
पंछियों ने देखो अपना बसेरा ही बदल लिया।।
कभी छाँव में आश्रय लेता था काफिला मगर
आज ठूँठा पड़ा दरख्त और पसरी वीरानियाँ।।


__ मौली

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