तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

शुक्रवार, 2 जनवरी 2015



जब से लगी तेरे प्रेम की उबटन मेरे अंग अंग
मैं निखरी संवरी मैं इठलाई पिया तेरे रंग रंग
पखावज़ की थाप न भाये,भाये मुरलिया धुन
बांध घुंघरू प्रीत की नाचूं कृष्णा तेरे संग संग।
।।मौली।।

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