विहँग नीड़
तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
शुक्रवार, 9 जनवरी 2015
आते बसंत को भला कब रोक पाया कोई
पतझड़ के कहर से कब बच पाया है कोई
शाश्वत है जीवन का इसे कैसे नकारे कोई
सत कर्मों से ही अब इसे संवारो हर कोई।।
।।मौली।।
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