तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

रविवार, 17 जुलाई 2016

राष्ट्र प्रेम

वीरों की कुर्बानियों का यह देश है इस देश की धरित्री का जो सन्देश है वीरांगनाओं के माथे का अभिषेक है वैमनस्यता का ह्रास,प्रेम का समावेश है सब धर्मों का सम्मान यहाँ धृष्टता का क्षमादान नही कहती हूँ हर दिन हर रात हिन्द की मैं शेरनी महिषासुरों की हूँ नाशिनी जयहिन्द का उदघोष जहां कण कण में वयाप्त है बलिदानों की पवित्र भूमि हम सबका अभिमान है मेरा भारत महान है हम भारत की संतान हैं हिन्द की हम शान है हिन्द हमारी आन है आओ मिलकर प्रण लें हम आतंकवाद को निर्मूल करें "मैं"के अंधकार खोल से निकल हक़ीकत के सूर्य का स्वागत करें दुष्टों का नाश कर मानवता का आह्वान करें धरित्री के दुलारों तुमको माँ का क़र्ज़ चुकाना है रक्तरंजित हुई वसुंधरा को फिर से शष्य श्यामला बनाना है।। मौली वन्दे मातरम

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