मुझको अतीत कर खुद वर्तमान और भविष्य में क्या खूब रम गये इतिहास के पन्नों पे काले अक्षर सा बिलखता मुझे तन्हा छोड़ आये।। मौली
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें