तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 25 जुलाई 2016

बेशकीमती

यूँ सरेराह खुद को बेज़ार न करना
तूफानों से डरकर कश्ती न छोड़ना
तुझे पाकर ही तो मैं बेशकीमती हुई
हारकर फिर से मुझे गरीब न करना।।
       मौली

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