तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
गुरुवार, 28 जुलाई 2016
भ्रमित मन
अल्हड़ नदी सा क्यों यूँ अनवरत बहता जाये ये मन
भ्रमित दिशाहारा सा किस ओर बहता जाये ये मन
सावन की रिमझिम में ये और उफ़न उफ़न सा जाये
किनारे की आस संजोये उन्मादित सा बहता जाये ये मन।।
मौली
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