तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़
बुधवार, 1 जनवरी 2014
३९-
चाँदनी रात को तारों को जमीं पर उतरते देखा है
चाँद को भी बादल के आगोश में सिमटते देखा है
रिमझिम-रिमझिम गिरती बारिश की फ़ुहारों में
खुद को कान्हा के प्रेम में डूबते-निखरते देखा है।।
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