तुम्हारी खोज से क्लान्त हो आश्रय लिया जहाँ....... वो है विहँग नीड़

सोमवार, 6 जनवरी 2014

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जीवन जहर भरा सागर अब कब अमृत घोलेंगें
तनहाई में हम रो लेंगें पर तेरे भेद न खोलेंगें।।

__ मौली

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